गूगल क्या है ? Google kya hai ?
आज के इंटरनेट की दुनिया में Google kya hai यह सबको पता है.लेकिन जो भी नया व्यक्ति इंटरनेट से जुडता है या इंटरनेट का इस्तेमाल करता है उसे Google kya hai यह मालूम होना जरुरी है.इसलिए इस आर्टिकल में हम गूगल क्या है और गूगल के अन्य प्रोडक्ट के बारे में बात करेंगे.
गूगल एक वेब सर्च इंजिन है और साथ ही अमेरिका की जानीमानी कंपनी भी है.ज्यादातर लोगों को लगता है की इंटरनेट का मतलब ही गूगल होता है.जब की ऐसा नही है.गूगल से पहले भी इंटरनेट अस्तित्व में था.लेकिन तब इसे सर्फ,ब्राउज़ या सर्च करने का कोई तरीका नही था.उस वक़्त केवल बड़े बड़े इंस्टिट्यूट ही इंटरनेट का इस्तेमाल करते थे.आम लोगो के बिच इंटरनेट इतना मशहूर नही था.लोग कम्प्यूटर का इस्तेमाल तो करते थे लेकिन इन कंप्यूटर पर इंटरनेट नही था.
उस ज़माने में इंटरनेट पर सर्च करना बेहद मुश्किल था.इंटरनेट पर किसी जानकारी को प्राप्त करने के लिए आपको उस वेबसाइट पर डायरेक्ट जाना पड़ता था.अगर आपको उस वेबसाइट का नाम नही पता होता तो फिर आप उस तक पोहंच ही नहीं सकते थे.आसान भाषा में समझा जाए तो मान लीजिए अगर आपको एक्सिस बैंक का कस्टमर केअर नंबर चाहिए.तो आपको एक्सिस बैंक की वेबसाइट पर सीधे जाना पड़ता था और अगर आपको एक्सिस बैंक की वेबसाइट नही पता तो आप उसे नही ढूंढ पाते थे.
इन्ही बातों को ध्यान में रखकर लैरी पेज और सर्जी ब्रिन नाम के दो छात्रों ने 4 सितंबर 1998 में गूगल की स्थापना की थी.हांलाकि गूगल की शुरुआत साल 1996 में हुयी थी.लेकिन तब गूगल महज के प्रोजेक्ट के रूप में था,जिसे स्टैंडफोर्ड यूनिवर्सिटी में पीएचडी डिग्री के लिए बनाया गया था.
स्थापना के बाद गूगल ने काफी उतार चढाव देखे. शुरुआत में गूगल महज एक प्रोजेक्ट था.इसे बैकरब नाम दिया गया.बैकरब का मतलब शाबासी देना होता है.और गूगल का एल्गोरिथ्म भी इसी सिद्धान्त पर काम करता है.1996 मे गूगल का होमपेज काफी सिंपल था.क्योंकि लैरी पेज और सर्जी ब्रिन को कोडिंग का उतना ज्ञान नही था.उस बात को याद रखा जा सके इसलिए गूगल के होमपेज को आज भी बेहद सिंपल रखा गया है.
शुरुआत में गूगल ने अलग अलग वेबसाइट को रैंक करना शुरू किया.इसी रैंकिंग के बदौतल गूगल सर्च इंजिन में वेबसाइट को दिखाता था.आज भी गूगल इसी तरीके का इस्तेमाल करता है.लेकिन समय के साथ गूगल ने और आधुनिक एल्गोरिथ्म का इस्तेमाल किया है.
गूगल का डोमेन “www.google.com” 15 सितम्बर 1997 को रजिस्टर किया गया था.इससे पहले गूगल का डोमेन google.stanford.edu था.जो की स्टेडफोर्ड यूनिवर्सिटी का सबडोमेन था.बादमे गूगल को फंडिंग मिली और गूगल का विकास होता गया.आज की तारीख में गूगल की कीमत 110 बिलियन डॉलर से ज्यादा है.वही गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट की कीमत 800 बिलियन डॉलर्स से अधिक है.
गूगल का काम करने का तरीका टेकनिकल भाषा में समझाना और समझना काफी जटिल है.इसलिए हम इसे आसान भाषा में समझने की कोशिश करेंगे.आज भी गूगल अपने सिद्धांत “बैकरब” पर काम करता है.बैकरब का मतलब होता है पिट थपथपाना या शाबासी देना.टेकनिकल भाषा में बैकरब का मतलब होता है बैकलिंक.
अपने सर्च इंजन में गूगल अपने सर्वर में जमा हर वेबसाइट को बैकलिंक के आधार पर रैंक करता है.यानि जिस वेबसाइट को जितने ज्यादा बैकलिंक मिले है उसपर गूगल ज्यादा भरोसा करता है.और उस वेबसाइट को सबसे पहले दिखाता है.गूगल अपने ग्राहक को जल्द से जल्द उसके सवाल का जवाब देने की कोशिश करता है.इसलिए गूगल लगातार अपने एल्गोरिथ्म में बदलाव करता रहता है.इसी के बदौलत आज सर्च इंजिन के क्षेत्र में गूगल का सिक्का चलता है.
गूगल के नाम पर ज्यादातर लोगो को गूगल वेबसाइट के बारे में ही पता है जबकि ऐसा नही है.गूगल के काफी सारे प्रोडक्ट हम रोजमर्राती जीवन में इस्तेमाल करते है. लेकिन हमें पता नही होता है की यह प्रोडक्ट गूगल द्वारा बनाये गए है.यहाँ पर हम सबसे ज्यादा इस्तेमाल किये जानेवाले 7 प्रोडक्ट के बारे बता रहे है जिसे गूगल ने बनाया है या जिनका गूगल ने अधिग्रहण किया है.
गूगल ने और भी कई सेवाओं को शुरू और कई सेवाओं का अधिग्रहण किया है.इसकी पूरी लिस्ट आप यहाँ देख सकते है
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