ग्रामीण उद्यमिता || Rural Entrepreneurship
ग्रामीण उद्यमिता || Rural Entrepreneurship: क्या है:ऐसी उद्यमशीलता जो की ग्रामीण छेत्रों के लोगो द्वारा वहाँ के संसाधनों के मूल्यवर्धन को निर्धारित करती हो उसे हम ग्रामीण उद्यमिता Rural Entrepreneurship कहते है.
जैसा की हम सभी बचपन से सुनते आ रहे है और हमें हमेशा पढ़ाया भी गया है की हमारा देश एक कृषि प्रधान देश है और हमारे देश की 70% आबादी कृषि पर निर्भर है,
इस बात में कोई दोहराई नहीं है परन्तु हमारे ग्रामीण इलाके आज भी दूसरे देशों की तुलना में अति पिछड़े है जिसके कारण आज ग्रामीण उद्यमशीलता की बात करना बहुत जरूरी है.
हमारे देश की अर्थ व्यवस्था के लिए ग्रामीण छेत्र अति आवश्यक है जिसके कारण ग्रामीण उद्यमिता का विकास होना बहुत ही जरूरी है.
आज मै आपको इस लेख के द्वारा ये बताने का प्रयास करूँगा की आखिर ग्रामीण उद्यमिता क्यूँ जरूरी है और ग्रामीण छेत्रों में हम उद्यमिता को कैसे बढ़ावा दे सकते है और हमारे देश की अर्थ व्यवस्था में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकते है.
उद्यमिता के बारे में तो आपको पता ही होगा,बस उद्यमिता में ग्रामीण जुड़ गया है जिसके कारण हम इसे ग्रामीण उद्यमिता कहते है.
ग्रामीण इलाक़ो के लोगो के द्वारा वहां के संग्सधानो को नए तकनीकी के द्वारा उपयोग में लाने हेतु किये गए उद्यम को हम ग्रामीण उद्यमिता || Rural Entrepreneurship कहते है.
जैसा की हम जानते है की जिस प्रकार शहरों का विकास ग्रामीण इलाकों की तुलना में अधिक हुआ है,आज भी हमारे देश के ग्रामीण इलाकों में विकास नहीं हो पाया है
जिसके कारण ग्रामीण इलाक़ो में रोज़गार न होने के कारण लोग शहरों में रोज़गार की तलाश में आते है और ग्रामीण इलाके हमेशा की तरह पिछड़े ही रह जातें है वहाँ का विकास नहीं हो पता है,
अगर ग्रामीण इलाकों का विकास नहीं होगा वहां उद्यमशीलता नहीं होगी तो वहां पर रोज़गार का सृजन नहीं हो पायेगा,
इसी के कारण हमारी सरकार अब ग्रामीण उद्यमिता को लेकर बहुत ही संग्वेदंशील हो गयी है क्योंकि किसी देश को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए उस देश के ग्रामीण इलाक़ो को भी मजबूत करना बहुत ही जरूरी है.
ग्रामीण इलाकों में कच्चे माल की मात्र भरपूर है वहां पर उपयुक्त मानव संसाधन भी है जिसका उपयोग करके उद्यमिता की जा सकती है
बस आपको जरुरत है सही दिशा की जिसे अपना कर हमारे गांव के लोग आत्मनिर्भर बन सके और उन्हें अपने गांव को छोड़ कर कही और जाने की आवश्यकता न हो.
गांव से शहर की तरफ पलायन का सबसे बड़ा कारण वहां पर बेरोज़गारी होना है ,रोज़गार न मिलने के कारण लोग ग्रामीण इलाक़ो को छोड़ कर शहर की तरफ आते है जो की उनके और उनके परिवार के लिए बहुत ही कस्टदायक होता है.
अगर ग्रामीण इलाकों में ही उद्यमशीलता होगी वहां नए नए कारोबार शुरू होंगे तो ग्रामीण इलाक़ो में रोज़गार बढ़ेंगे जिसके कारण वहां के लोगों को शहर नहीं आना पड़ेगा और ग्रामीण इलाक़ो का आर्थिक विकास भी हो पायेगा.
जैसा कि हम जानते हैं हमारे गांव और हमारे शहरों में बहुत ही ज्यादा अंतर है गांव में रोज़गार ना होने के कारण गांव की प्रति व्यक्ति आय शहरों की तुलना में बहुत ही कम होती है जिसके कारण लोगो का रुख शहर के तरफ बढ़ जाता है
अगर गांव में उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाएगा तो हमारे ग्रामीण इलाकों में प्रति व्यक्ति आय वृद्धि होगी जिसके कारण गांव के लोग गांव में ही रहेंगे और वही रोज़गार करके अपना जीवन गुजारा कर सकेंगे
अगर हमारे देश के ग्रामीण इलाकों में उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाएगा तब हम देखेंगे कि गांव में साक्षरता वृद्धि होगी उद्यमिता के सहारे कई ऐसे ट्रेनिंग सरकार के द्वारा या एनजीओ या कई संगठित ऐसे संगठन होते हैं जिनके द्वारा उद्यमिता के ऊपर ट्रेनिंग दिए जाते हैं
इन्हीं ट्रेनिंग के जरिए ग्रामीण इलाकों में साक्षरता दर में वृद्धि भी सुनिश्चित होती है.
ग्रामीण इलाकों में अगर उद्यमिता होगी तब हर व्यक्ति को चाहे वह महिला हो या पुरुष हो या फिर युवा हो हर एक को काम करने का मौका मिलता है
जिसके कारण उनकी गरीबी दूर होती है जब तक उन्हें काम नहीं मिलेगा तब तक वह आय नहीं कर पाएंगे अगर वह आय करेंगे तभी गांव से पलायन में कमी आएगी.
आप सभी जानते हैं कि जब तक साक्षरता नहीं होगी तब तक लोग जागृत नहीं होंगे ग्रामीण इलाकों में उद्यमिता होने से जागरूकता बढती है और साथ ही साक्षरता दर भी बढ़ती है
जिसके कारण लोक जागृत होते हैं सचेतन होते हैं और खासकर युवाओं में सचेतनता बढती है उनकी सोचने समझने की क्षमता का विकास होता है
अगर ग्रामीण इलाकों के युवाओं में सचेतनता होगी तब हर घर जागृत होंगे तब गांव का विकास निश्चित हो जाता है
ग्रामीण इलाकों में अर्थव्यवस्था का सुधार होने से हमारे देश की अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ा सुधार होता है आज भी हमारे देश में ऐसे बहुत से कृषि संबंधित उत्पाद है जो निर्यात किए जाते हैं
किये गए निर्यात सामग्रियों में और भी बढ़ोतरी की जा सकती है अगर हमारे ग्रामीण इलाकों में उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाए और अधिक से अधिक उत्पादों या फसल की अच्छी गुणवता के साथ उपज की जाए
अच्छी गुणवत्ता के उत्पाद को अधिक से अधिक मात्रा में निर्यात करने से हमारे देश की पूरी अर्थव्यवस्था और भी मजबूत होगी.
ग्रामीण उद्यमिता || Rural Entrepreneurship को बढ़ावा देने से ही असल में हमारे देश का विकास हो पायेगा.
आज 2020 में भी हमारी ग्रामीण इलाके दूसरे देशों की ग्रामीण इलाकों की तुलना में बहुत पिछड़े हैं जिसका मुख्य कारण सही तकनीकी का ज्ञान ना होना है
आज हमारे देश की सरकार की तरफ से या ऐसे कई संगठन है एनजीओ से हैं जिनके द्वारा ट्रेनिंग दी जाती है जिस में किस तरह तकनीकी का उपयोग करके अपनी आय को बढ़ावा दे सकते हैं
इसके बारे में बताया जाता है हमारे ग्रामीण इलाकों के निवासियों को हमेशा यह कोशिश करनी चाहिए की उन ट्रेनिंग में जाकर ट्रेनिंग लिया जाए ताकि कौन सी तकनीकी उनके काम आ सके उसके बारे में उन्हें पता चल सके
तकनीकी या प्रौद्योगिकी का सहारा लेकर किसी भी काम को अच्छी गुणवत्ता और तेजी से कि जा सकती है
शैक्षणिक योग्यता कम होने के कारण ग्रामीण इलाकों के निवासी हमेशा अपडेट नहीं रह पाते हैं जिसके कारण कोई भी नया काम या नहीं तकनीकी का उपयोग ग्रामीण लोग करने से डरते हैं
वह हमेशा अपनी परंपरागत किए गए कार्य विधि यों का समर्थन करते हैं जिसके कारण ग्रामीण इलाकों में नई तकनीकी का उपयोग न हो पाने के कारण वहां पर ग्रामीण उद्यमिता || Rural Entrepreneurship का विकास नहीं हो पाता है.
जब आप अपने तरीकों के साथ अकेले काम करते हैं तब आप उतना उत्पादन नहीं कर सकते हैं जितना कि एक समूह के द्वारा किया जा सकता है अकेले काम करने से आप तकनीकी का उपयोग नहीं करते हैं इसी कारण आपकी लागत बढ़ जाती है और अपना फायदा नहीं होता है
इसी की जगह अगर आप नई तकनीकों के साथ समूह में काम करें तब आपकी उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी और आपकी उत्पादन की लागत भी कम होगी जिसके कारण आपको मुनाफ़ा भी ज्यादा होगा
ग्रामीण इलाकों में जागरूकता ना होने के कारण ग्रामीण लोग बिज़नेस में निवेश करने से डरते हैं जबकि आज हमारे देश में कई ऐसे सरकारी योजनाएं हैं इनका लाभ उठाकर नया बिज़नेस किया जा सकता है या फिर पुराने उद्यम को नयी तकनीकी के सहारे बड़ा किया जा सकता है.
जैसा कि हम जानते हैं खेती तो किसान करता है पर अनाजों का मूल्य बिचौलियों पर निर्भर करता है ऐसा क्यों होता है इसका मुख्य कारण है ग्रामीण इलाकों में अपने स्तर पर भंडार या गोदाम का नहीं होना
किसान अपने द्वारा बनाए गए उत्पादों को बाजार में कम दामों में बिचौलियों को बेच देते हैं इसके बाद बिचौलिए उन उत्पादों को अपने गोदाम में रख देते हैं जिसके बाद वह अपने मनचाहे दाम में अन्य बाजार में उन उत्पादों को बेचते हैं
इससे उन्हें बहुत फायदा होता है परंतु किसानों का कोई फायदा नहीं होता अगर ग्रामीण इलाकों में गोदाम की व्यवस्था होती है तो किसानों को अपना माल बिचौलियों को नहीं बेचना पड़ेगा वे सीधा उपभोक्ताओं या बाजार में अपनी उत्पाद को बेच सकेंगे जिससे कि उन्हें सही मुनाफ़ा मिलेगा.
सरकारी योजनाओं के तहत कई ऐसे प्रशिक्षण केंद्र हैं जहां जाकर ग्रामीण लोग प्रशिक्षण ले सकते हैं कि कैसे कैसे अपने कास्ट ऑफ प्रोडक्शन को कम कर सकते हैं
कैसे अपने उत्पादन को उच्च स्तर पर ले जा सकते हैं और अपने उत्पादन की विकास कर सकते हैं
इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि उनका प्रशिक्षित होना जब तक वे उद्यमिता के बारे में जानेंगे नहीं तब तक उनमें जागरूकता नहीं आएगी जागरूकता नहीं आएगी तो वह तकनीकी का उपयोग नहीं कर पाएंगे
तकनीकी का उपयोग न करने के कारण उनकी दैनिक जीवन का रोज़गार पहले ही जैसा रहेगा उसमें कोई बदलाव नहीं आएगा.
ग्रामीण उद्यमिता को हम चार भागों में बांट सकते हैं जो कि निम्नलिखित हैं
उद्यमिता अकेले भी शुरू कर सकते हैं ऐसा कोई उद्यम या व्यवसाय जो कि किसी अकेले व्यक्ति के द्वारा शुरू किया गया वह व्यक्तिगत श्रेणी में आते हैं
ग्रामीण इलाकों में हम ऐसे कई कुटीर उद्योग देखते हैं जो कि किसी एक परिवार के द्वारा या फिर अकेले एक व्यक्ति के द्वारा किया जाता है
इसी तरह आप भी छोटे स्तर पर किसी उद्यम को शुरू कर सकते हैं
ऐसी उद्यमिता जो की सामूहिक रूप से शुरू की गई हो उन्हें हम सामूहिक उद्यमिता कहते हैं 2 से ज्यादा व्यक्ति या महिलाएं मिलकर समूह बनाकर किसी उद्योग या उद्यमिता को शुरू कर सकते हैं
जिससे कि उनकी उत्पादन की क्षमता अकेले व्यक्ति के द्वारा शुरू की गई उद्यमिता से भी ज्यादा होगी और मुनाफा भी अधिक से अधिक होगा.
सहकारिता Co-Operatives
सहकारिता का अर्थ है किसी संगठन की सहायता के साथ शुरू किया गया कोई ग्रामीण उद्यम जोकि एक बड़े समूह के द्वारा संचालित की जाती हो
अर्थात हम देखेंगे शहरी इलाकों में कई ऐसे सोशल एनजीओ हैं
जिनकी रूचि ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने की होती है इसी के समानांतर कई ऐसे प्राइवेट वेंचर कंपनियां भी होती हैं जिनकी रूचि ग्रामीण उद्यमिता में होती है
ऐसे ग्रामीण समूह जोकि वेंचर कंपनियां या एनजीओ के साथ मिलकर उद्यमिता का संचालन करती हो उन्हें हम सहकारिता उद्यमिता की श्रेणी में रखते हैं
क्लस्टर फॉरमेशन
ऐसी उद्यमिता जो कि जिले स्तर पर शुरू की जाती हो उसे हम क्लस्टर फॉरमेशन उद्यमिता कहते हैं
उदाहरण के रूप हम ऐसे कई गांव देखते हैं जो अपनी कारीगरी के लिए विख्यात होती है उस पूरे गांव या कहें जीले में सिर्फ वही काम एक बड़े समूह के द्वारा की जाती है
जोकि क्लस्टर फॉरमेशन उद्यमिता के अंतर्गत आती है
अगर आप ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देना चाहते हैं या फिर खुद से कोई ग्रामीण उद्यम की शुरुआत करना चाहते हैं तो फिर आपको हमेशा अपडेट रहना पड़ेगा
ऐसे बहुत से सरकारी योजनाएं हैं जिनका लाभ उठाकर ग्रामीण उद्यम बहुत ही सहज रूप से शुरू किया जा सकता है
आज हमारी सरकार ने कई ऐसे योजनाओं का संचालन किया है जोकि विशेष कर ग्रामीण उद्यमिता को ही बढ़ावा देने के लिए है
आप अगर उद्यमिता करना चाहते हैं ग्रामीण स्तर पर तो आप इस वेबसाइट udyami.org.in पर जाकर जो कि भारत सरकार के द्वारा शुरू की गई है इस पर जाकर आप अधिक जानकारी ले सकते हैं
मैंने इस लेख के द्वारा आप को यह बताने की कोशिश की है कि ग्रामीण उद्यमिता || Rural Entrepreneurship क्या है कैसे इसको बढ़ावा दिया जा सकता है क्या क्या इसमें कठिनाइयाँ होती हैं और कितने प्रकार की ग्रामीण उद्यमिता होती है मुझे उम्मीद है कि आपको यह लेख पसंद आई होगी मैंने ग्रामीण उद्यमिता से जुड़ी हर एक चीज बताने की कोशिश यहाँ की है अगर आपको कोई सवाल पूछना हो तो बे झिझक कमेंट बॉक्स में आप अपना सवाल पूछ सकते हैं.